*рд╡्рдпрдХ्рддि рдХो рд╕рджा рд╕ुрдЦ рдЪाрд╣िрдП । рд╕ुрдЦ рдХी рдЦोрдЬ рдоें рд╡рд╣ рджिрди рд░ाрдд рдЕрдиेрдХ рдЙрдкाрдп рдХрд░рддा рд░рд╣рддा рд╣ै।*

*🙏जय माँ भवानी🙏*
4.8.19
व्यक्ति को सदा सुख चाहिए । सुख की खोज में वह दिन रात अनेक उपाय करता रहता है। कभी धन में सुख को ढूंढता है कभी भोजन में कभी मनोरंजन में कभी परिवार वालों के साथ बैठकर गपशप मारने में कहीं धन सम्मान में कहीं पद प्रतिष्ठा में इत्यादि ।
परंतु आजकल जो स्थिति बनती जा रही है, वह पिछले 30 40 वर्ष पहले की स्थिति से बहुत भिन्न है । आज से 30 40 वर्ष पहले लोग ज्यादा सुखी थे , आज इतने सुखी नहीं हैं, जबकि 30 40 वर्ष पहले मनुष्यों के पास इतने भौतिक साधन नहीं थे । धन-संपत्ति मकान मोटर गाड़ी नौकर चाकर इतनी बिजली रेलगाड़ियां हवाई जहाज कंप्यूटर मोबाइल फोन इत्यादि ये साधन उस समय इतने नहीं थे । कुछ साधन तो थे ही नहीं। अभी पिछले 15 20 वर्षों में ही बनाए गए । तो तब इतने साधन न होते हुए भी लोग अधिक सुखी थे । आज सुख के साधन बढ़ गए , उसके बाद भी सुख नहीं बढ़ा, बल्कि कम हो गया ।
तो हमें विचार करना चाहिए कि *कहीं हम कोई भूल तो नहीं कर रहे । कहीं हमने ऐसा तो नहीं मान लिया , कि जो सुख के असली साधन थे, उनको छोड़ दिया । और जो काम चलाऊ साधन थे, उनको हमने सुख का बड़ा साधन मान लिया।*
लगता तो कुछ ऐसा ही है । *वास्तव में मनुष्यों का मूल्य अधिक है, तथा धन संपत्ति का कम। परंतु हमने इस सत्य को छोड़ दिया । आज संपत्ति का मूल्य अधिक मानने लगे और माता-पिता मित्र संबंधी आदि मनुष्यों का मूल्य कम आंकने लगे । इसलिए परिणाम विपरीत हो गया।*
*आज धन आदि साधन अधिक हैं , तो भी व्यक्ति दुखी है। तब परिवार में संगठन, सेवा, त्याग, बड़ों का सम्मान, सच्चाई , ईमानदारी आदि थे, और धन आदि साधन कम होने पर भी परिवार के लोग अधिक सुखी थे।*  इस पर विचार करें और अपनी भूल का सुधार करें . -
*🚩🙏राजकेशरिया🙏🚩*

рдХोрдИ рдЯिрдк्рдкрдгी рдирд╣ीं

Blogger рдж्рд╡ाрд░ा рд╕ंрдЪाрд▓िрдд.