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नमस्कार

मेरा अनुमान हे की आज हमारे राजपूत क्षत्रिय समाज को ऒर अधिक विकसित ,शिक्षित एव सवस्थ करने के लिए सगठन को मजबुत ओर वीकास की अत्यंत आवश्यकता हे क्योकि  'संगठन में शक्ति है ।' हमारे राजपूत क्षत्रिय समाज को इस मूल मंत्र को समझने और क्रियांवित करने का प्रयास करना होगा । संगठन से बड़ी कोई शक्ति नहीं है । बिना संगठन के कोई भी देश व समाज सुचारू रूप से नहीं चल सकता है ।

     संगठन ही समाज का दीपक है- संगठन ही शांति का खजाना है । संगठन ही सर्वोत्कृषष्ट शक्ति है । संगठन ही समाजोत्थान का आधर है । संगठन बिना समाज का उत्थान संभव नहीं । संगठन के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता ।, क्योंकि संगठन ही समाज एवं देश के लिए अमोघ शक्ति है, किन्तु विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है । विघटन समाज को तोड़ता है और संगठन व्यक्ति को जोड़ता है । संगठन समाज एवं देश को उन्नति के शिखर पर पहुंचा देता है । आपसी फूट एवं समाज का विनाश कर देती है ।

         संगठन किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो, वह सदैव अच्छा होता है- संगठन ही प्रगति का प्रतीक है, जिस घर में संगठन होता है उस घर में सदैव शांति एवं सुख की वर्षा होती है । चाहे व्यक्ति गरीब ही क्यों न हो, किन्तु यदि उसके घर-परिवार में संगठन है अर्थात सभी मिलकर एक हैं तो वह कभी भी दुखी नहीं हो सकता, लेकिन जहाँ या जिस घर में विघटन है अर्थात एकता नहीं है तो उस घर में चाहे कितना भी धन, वैभव हो किन्तु विघटन, फूट हो तो हानि ही हाथ आती है । संगठन बहुत बड़ी उपलब्धि है, जहाँ संगठन है वहां कोई भी विद्रोही शक्ति सफल नहीं हो सकती है, जहाँ संगठन है वहां बहुत बड़ा बोझ उठाना भारी नहीं लगता । जहाँ संगठन है, एकता है वहां हमेशा प्रेम-वात्सल्य बरसता है- एकता ही प्रेम को जन्म देती है, एकता ही विकास को गति देती है । जो समाज संगठित होगा, एकता के सूत्र में बंधा होगा, वह कभी भी परास्त नहीं हो सकता- क्योंकि संगठन ही सर्वश्रेष्ठ शक्ति है, किन्तु जहाँ विघटन है, एकता नहीं है उस समाज का अस्तित्व खतरे में रहता हे ।   बहुत बड़े विघटित समाज से छोटा सा संगठित समाज श्रेष्ठ है । यदि हम समाज को आदर्शशील बनाना चाहते हे तो संगठन की और कदम बढाओ । संगठन के बिना किसी भी समाज की परिकल्‍पना ही नहीं की जा सकती हे ।

श्री गुजरात राजपूत क्षत्रिय संगठन ,
श्री भवानी यूवा समाज सेवा ग्रुप गुजरात
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रऩजितसिंह जे राजपूत वराऩा
9377012340

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