*рдЬीрд╡рди рдоें рдЖрдкрдд्рддि рдХाрд▓ рднी рдЖрддे рд╣ैं рдФрд░ рд╕ुрдЦ рдХे рдЕрд╡рд╕рд░ рднी рдЖрддे рд╣ैं । рд╕рдмрдХे рдЬीрд╡рди рдоें рдЖрддे рд╣ैं । рдХिрд╕ी рдХे рдЬीрд╡рди рдоें рдХрдо рдЖрддे рд╣ैं рдХिрд╕ी рдХे рдЬीрд╡рди рдоें рдЕрдзिрдХ рдЖрддे рд╣ैं । рд╕ंрд╕ाрд░ рдЗрд╕ी рдХा рдиाрдо рд╣ै , рдЬрд╣ां рд╕ुрдЦ рдФрд░ рджुрдЦ рджोрдиों рднोрдЧрдиे рдкрдб़рддे рд╣ैं*

जीवन में आपत्ति काल भी आते हैं और सुख के अवसर भी आते हैं । सबके जीवन में आते हैं । किसी के जीवन में कम आते हैं किसी के जीवन में अधिक आते हैं । संसार इसी का नाम है , जहां सुख और दुख दोनों भोगने पड़ते हैं ।
*जब लोग संसार की इस व्यवस्था को ठीक से नहीं समझ पाते , तब वे दुख आने पर विचलित हो जाते हैं , घबरा जाते हैं , मन बुद्धि पर नियंत्रण नहीं रख पाते , और कुछ भी असामान्य क्रिया कर बैठते हैं.*
*और जिन दिनों में सुख होता है , उन दिनों में फूले नहीं समाते , बहुत नाचते कूदते हैं । यह दोनों ही स्थितियां अच्छी नहीं हैं।*
जो व्यक्ति संसार को समझना चाहता है, अपने जीवन को संतुलित रखना चाहता है, हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना चाहता है, उसे दुख आने पर घबराना नहीं चाहिए।  *मन को  शांत रखते हुए, गंभीर होकर उस दुख को दूर करने का उपाय सोचना चाहिए। स्वयं सोच पाए, तो अच्छा।  न सोच पाए , तो दूसरे विद्वानों कुशल व्यक्तियों से सहयोग लेना चाहिए।* ऐसा करने से उसकी समस्याएं और दुख दूर हो सकते हैं ।
इसी प्रकार से *जिन दिनों में सुख आवे , तब बहुत नाचना कूदना नहीं चाहिए। तब भी शांत भाव से उस परिस्थिति को पार करना चाहिए।* ऐसा करने से आप आनंदित होकर जीवन जिएंगे।  आपका जीवन सफल होगा। दूसरों के लिए आदर्श रूप होगा । जिससे दूसरे लोग भी आपके जीवन को देखकर अपने जीवन का कल्याण करेंगे -

🚩राजकेशरिया🚩

рдХोрдИ рдЯिрдк्рдкрдгी рдирд╣ीं

Blogger рдж्рд╡ाрд░ा рд╕ंрдЪाрд▓िрдд.