*ईश्वर*

जमीन जल चुकी है आसमान बाकी है
दरख्तों तुम्हारा इम्तहान बाकी है

वो जो खेतों की मेढ़ों पर उदास बैठे हैं
उन्ही की आखों में अब तक ईमान बाकी है

बादलों समय पर बरस जाना  इस बार....
सूखी जमीनों पर
किसी का मकान गिरवी है और किसी  का लगान बाकी है......                       http://ranjitsinh553.blogspot.in/?m=1
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